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why Havan is most sacred ritual in Hinduism



Denigration of Hindu sacred symbols has become a fashion in Bollywood. Recent example is ‘Havan Kund maston ka jhund’, a song from the movie Bhag Milkha Bhag. 

Is Havan really a useless ritual that can be mocked by anyone in the name of freedom of expression or art? 

This article by Agniveer in Hindi explains that why Havan is most sacred ritual in Hinduism and why is it the duty of every human to perform Havan.

 This is to show how Havan is the source of all happiness and bliss in both material and spiritual world. Read this, know your roots..

हवन / यज्ञ/ अग्निहोत्र मनुष्यों के साथ सदा से चला आया है। हिन्दू धर्म में सर्वोच्च स्थान पर विराजमान यह हवन आज प्रायः एक आम आदमी से दूर है। दुर्भाग्य से इसे केवल कुछ वर्ग, जाति और धर्म तक सीमित कर दिया गया है। कोई यज्ञ पर प्रश्न कर रहा है तो कोई मजाक। इस लेख का उद्देश्य जनमानस को यह याद दिलाना है कि हवन क्यों इतना पवित्र है, क्यों यज्ञ करना न सिर्फ हर इंसान का अधिकार है बल्कि कर्त्तव्य भी है. यह लेख किसी विद्वान का नहीं, किसी सन्यासी का नहीं, यह लेख १०० करोड़ हिंदुओं ही नहीं बल्कि ७ अरब मनुष्यों के प्रतिनिधि एक साधारण से इंसान का है जिसमें हर नेक इंसान अपनी छवि देख सकता है. यह लेख आप ही के जैसे एक इंसान के हृदय की आवाज है जिसे आप भी अपने हृदय में महसूस कर सकेंगे..

हवन- मेरी आस्था

हिंदू धर्म में सर्वोपरि पूजनीय वेदों और ब्राह्मण ग्रंथों में यज्ञ/हवन की क्या महिमा है, उसकी कुछ झलक इन मन्त्रों में मिलती है-

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्. होतारं रत्नधातमम् [ ऋग्वेद १/१/१/]

समिधाग्निं दुवस्यत घृतैः बोधयतातिथिं. आस्मिन् हव्या जुहोतन. [यजुर्वेद 3/1]

अग्निं दूतं पुरो दधे हव्यवाहमुप ब्रुवे. [यजुर्वेद 22/17]

सायंसायं गृहपतिर्नो अग्निः प्रातः प्रातः सौमनस्य दाता. [अथर्ववेद 19/7/3]

प्रातः प्रातः गृहपतिर्नो अग्निः सायं सायं सौमनस्य दाता. [अथर्ववेद 19/7/4]

तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः [यजुर्वेद 31/9]

अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तोधि ब्रुवन्तु तेवन्त्वस्मान [यजुर्वेद 19/58]

यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म [शतपथ ब्राह्मण 1/7/1/5]

यज्ञो हि श्रेष्ठतमं कर्म [तैत्तिरीय 3/2/1/4]

यज्ञो अपि तस्यै जनतायै कल्पते, यत्रैवं विद्वान होता भवति [ऐतरेय ब्राह्मण १/२/१]

यदैवतः स यज्ञो वा यज्याङ्गं वा.. [निरुक्त ७/४]

इन मन्त्रों में निहित अर्थ और प्रार्थनाएं इस लेख के अंत में दिए जायेंगे जिन्हें पढकर कोई भी व्यक्ति खुद हवन करके अपना और औरों का भला कर सकता है. पर इन मन्त्रों का निचोड़ यह है कि ईश्वर मनुष्यों को आदेश करता है कि हवन/यज्ञ संसार का सर्वोत्तम कर्म है, पवित्र कर्म है जिसके करने से सुख ही सुख बरसता है.

यही नहीं, भगवान श्रीराम को रामायण में स्थान स्थान पर ‘यज्ञ करने वाला’ कहा गया है. महाभारत में श्रीकृष्ण सब कुछ छोड़ सकते हैं पर हवन नहीं छोड़ सकते. हस्तिनापुर जाने के लिए अपने रथ पर निकल पड़ते हैं, रास्ते में शाम होती है तो रथ रोक कर हवन करते हैं. अगले दिन कौरवों की राजसभा में हुंकार भरने से पहले अपनी कुटी में हवन करते हैं. अभिमन्यु के बलिदान जैसी भीषण घटना होने पर भी सबको साथ लेकर पहले यज्ञ करते हैं. श्रीकृष्ण के जीवन का एक एक क्षण जैसे आने वाले युगों को यह सन्देश दे रहा था कि चाहे कुछ हो जाए, यज्ञ करना कभी न छोड़ना.

जिस कर्म को भगवान स्वयं श्रेष्ठतम कर्म कहकर करने का आदेश दें, वो कर्म कर्म नहीं धर्म है. उसका न करना अधर्म है.

हवन- मेरा जीवन

मेरा जन्म हुआ तो हवन हुआ. पहली बार मेरे केश कटे तो हवन हुआ. मेरा नामकरण हुआ तो हवन हुआ. जन्मदिन पर हवन हुआ, गृह प्रवेश पर हवन हुआ, मेरे व्यवसाय का आरम्भ हुआ तो हवन हुआ, मेरी शादी हुई तो हवन हुआ, बच्चे हुए तो हवन हुआ, संकट आया तो हवन हुआ, खुशियाँ आईं तो हवन हुआ. एक तरह से देखूं तो हर बड़ा काम करने से पहले हवन हुआ. किस लिए? क्योंकि मेरी एक आस्था है कि हवन कर लूँगा तो भगवान साथ होंगे. मैं कहीं भी रहूँगा, भगवान साथ होंगे. कितनी भी कठिन परिस्थिति हों, भगवान मुझे हारने नहीं देंगे. हवन कुंड में डाली गयी एक एक आहुति मेरे जीवन रूपी अग्नि को और विस्तार देगी, उसे ऊंचा उठाएगी. इस जीवन की अग्नि में सारे पाप जलकर स्वाहा होंगे और मेरे सत्कर्मों की सुगंधि सब दिशाओं में फैलेगी. मैं हार और विफलताओं के सारे बीज इस हवन कुंड की अग्नि में जलाकर भस्म कर डालता हूँ ताकि जीत और सफलता मेरे जीवन के हिस्से हों. इस विश्वास के साथ हवन मेरे जीवन के हर काम में साथ होता है.

हवन- मेरी मुक्ति

हवन कुंड की आग, उसमें स्वाहा होती आहुतियाँ और आहुति से और प्रचंड होने वाली अग्नि. जीवन का तेज, उसमें डाली गयीं शुभ कर्मों की आहुतियाँ और उनसे और अधिक चमकता जीवन! क्या समानता है! हवन क्या है? अपने जीवन को उजले कर्मों से और चमकाने का संकल्प! अपने सब पाप, छल, विफलता, रोग, झूठ, दुर्भाग्य आदि को इस दिव्य अग्नि में जला डालने का संकल्प! हर नए दिन में एक नयी उड़ान भरने का संकल्प, हर नयी रात में नए सपने देखने का संकल्प! उस ईश्वर रूपी अग्नि में खुद को आहुति बनाके उसका हो जाने का संकल्प, उस दिव्य लौ में अपनी लौ लगाने का संकल्प और इस संसार के दुखों से छूट कर अग्नि के समान ऊपर उठ मुक्त होने का संकल्प! हवन मेरी सफलता का आर्ग है. हवन मेरी मुक्ति का मार्ग है, ईश्वर से मिलाने का मार्ग है. मेरे इस मार्ग को कोई रोक नहीं सकता.

हवन- मेरा भाग्य

लोग अशुभ से डरते हैं. किसी पर साया है तो किसी पर भूत प्रेत. किसी पर किसी ने जादू कर दिया है तो किसी के ग्रह खराब हैं. किसी का भाग्य साथ नहीं देता तो कोई असफलताओं का मारा है. क्यों? क्योंकि जीवन में संकल्प नहीं है. हवन कुंड के सामने बैठ कर उसकी अग्नि में आहुति डालते हुए इदं न मम कहकर एक बार अपने सब अच्छे बुरे कर्मों को उस ईश्वर को समर्पित कर दो. अपनी जीत हार उस ईश्वर के पल्ले बाँध दो. एक बार पवित्र अग्नि के सामने अपने संकल्प की घोषणा कर दो. एक बार कह दो कि अब हार भी उसकी और जीत भी उसकी, मैंने तो अपना सब उसे सौंप दिया. तुम्हारी हर हार जीत में न बदल जाए तो कहना. हर सुबह हवन की अग्नि में इदं न मम कहकर अपने काम शुरू करना और फिर अगर तुम्हे दुःख हो तो कहना. जिस घर में हवन की अग्नि हर दिन प्रज्ज्वलित होती है वहाँ अशुभ और हार के अँधेरे कभी नहीं टिकते. जिस घर में पवित्र अग्नि विराजमान हो उस घर में विनाश/अनिष्ट कभी नहीं हो सकता.

हवन- मेरा स्वास्थ्य

आस्था और भक्ति के प्रतीक हवन को करने के विचार मन में आते ही आत्मा में उमड़ने वाला ईश्वर प्रेम वैसा ही है जैसे एक माँ के लिए उसके गर्भस्थ अजन्मे बच्चे के प्रति भाव! न जिसको कभी देखा न सुना, तो भी उसके साथ एक कभी न टूटने वाला रिश्ता बन गया है, यही सोच सोच कर मानसिक आनंद की जो अवस्था एक माँ की होती है वही अवस्था एक भक्त की होती है. इस हवन के माध्यम से वह अपने अजन्मे अदृश्य ईश्वर के प्रति भाव पैदा करता है और उस अवस्था में मानसिक आनंद के चरम को पहुँचता है. इस चरम आनंद के फलस्वरूप मन विकार मुक्त हो जाता है. मस्तिष्क और शरीर में श्रेष्ठ रसों (होर्मोंस) का स्राव होता है जो पुराने रोगों का निदान करता है और नए रोगों को आने नहीं देता. हवन करने वाले के मानसिक रोग दस पांच दिनों से ज्यादा नहीं टिक सकते.

हवन में डाली जाने वाली सामग्री (ध्यान रहे, यह सामग्री आयुर्वेद के अनुसार औषधि आदि गुणों से युक्त जड़ी बूटियों से बनी हो) अग्नि में पड़कर सर्वत्र व्याप्त हो जाती है. घर के हर कोने में फ़ैल कर रोग के कीटाणुओं का विनाश करती है. वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि हवन से निकलने वाला धुआँ हवा से फैलने वाली बीमारियों के कारक इन्फेक्शन करने वाले बैक्टीरिया (विषाणु) को नष्ट कर देता है. अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाइए- http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-08-17/health/28188655_1_medicinal-herbs-havan-nbri

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में साल भर में होने वाली ५७ मिलियन मौत में से अकेली १५ मिलियन (२५% से ज्यादा) मौत इन्ही इन्फेक्शन फैलाने वाले विषाणुओं से होती हैं! हवन करने से केवल ये बीमारियाँ ही नहीं, और भी बहुत सी बीमारी खत्म होती हैं, जैसे-

१. सर्दी/जुकाम/नजला

२. हर तरह का बुखार

३. मधुमेह (डायबिटीज/शुगर)

४. टीबी (क्षय रोग)

५. हर तरह का सिर दर्द

६. कमजोर हड्डियां

७. निम्न/उच्च रक्तचाप

८. अवसाद (डिप्रेशन)

इन रोगों के साथ साथ विषम रोगों में भी हवन अद्वितीय है, जैसे

९. मूत्र संबंधी रोग

१०. श्वास/खाद्य नली संबंधी रोग

११. स्प्लेनिक अब्सेस

१२. यकृत संबंधी रोग

१३. श्वेत रक्त कोशिका कैंसर

१४. Infections by Enterobacter Aerogenes

१५. Nosocomial Infections

१६. Extrinsic Allergic Alveolitis

१७. nosocomial non-life-threatening infections

और यह सूची अंतहीन है! सौ से भी ज्यादा आम और खास रोग यज्ञ थैरेपी से ठीक होते हैं! सबसे बढ़कर हवन से शरीर, मन, वातावरण, परिस्थितियों और भाग्य पर अद्भुत प्रभाव होता है. घर परिवार, बच्चे बड़े सबके उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्य और भाग्य के लिए यज्ञ से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता! दिन अगर यज्ञ से शुरू हो तो कुछ अशुभ हो नहीं सकता, कोई रोग नहीं हो सकता.

हवन- मेरा सबकुछ

यज्ञ/हवन से सम्बंधित कुछ मन्त्रों के भाव सरल शब्दों में कुछ ऐसे हैं

– इस सृष्टि को रच कर जैसे ईश्वर हवन कर रहा है वैसे मैं भी करता हूँ.

– यह यज्ञ धनों का देने वाला है, इसे प्रतिदिन भक्ति से करो, उन्नति करो.

– हर दिन इस पवित्र अग्नि का आधान मेरे संकल्प को बढाता है.

– मैं इस हवन कुंड की अग्नि में अपने पाप और दुःख फूंक डालता हूँ.

– इस अग्नि की ज्वाला के समान सदा ऊपर को उठता हूँ.

– इस अग्नि के समान स्वतन्त्र विचरता हूँ, कोई मुझे बाँध नहीं सकता.

– अग्नि के तेज से मेरा मुखमंडल चमक उठा है, यह दिव्य तेज है.

– हवन कुंड की यह अग्नि मेरी रक्षा करती है.

– यज्ञ की इस अग्नि ने मेरी नसों में जान डाल दी है.

– एक हाथ से यज्ञ करता हूँ, दूसरे से सफलता ग्रहण करता हूँ.

– हवन के ये दिव्य मन्त्र मेरी जीत की घोषणा हैं.

– मेरा जीवन हवन कुंड की अग्नि है, कर्मों की आहुति से इसे और प्रचंड करता हूँ.

– प्रज्ज्वलित हुई हे हवन की अग्नि! तू मोक्ष के मार्ग में पहला पग है.

– यह अग्नि मेरा संकल्प है. हार और दुर्भाग्य इस हवन कुंड में राख बने पड़े हैं.

– हे सर्वत्र फैलती हवन की अग्नि! मेरी प्रसिद्धि का समाचार जन जन तक पहुँचा दे!

– इस हवन की अग्नि को मैंने हृदय में धारण किया है, अब कोई अँधेरा नहीं.

– यज्ञ और अशुभ वैसे ही हैं जैसे प्रकाश और अँधेरा. दोनों एक साथ नहीं रह सकते.

– भाग्य कर्म से बनते हैं और कर्म यज्ञ से. यज्ञ कर और भाग्य चमका ले!

– इस यज्ञ की अग्नि की रगड़ से बुद्धियाँ प्रज्ज्वलित हो उठती हैं.

– यह ऊपर को उठती अग्नि मुझे भी उठाती है.

– हे अग्नि! तू मेरे प्रिय जनों की रक्षा कर!

– हे अग्नि! तू मुझे प्रेम करने वाला साथी दे. शुभ गुणों से युक्त संतान दे!

– हे अग्नि! तू समस्त रोगों को जड़ से काट दे!

– अब यह हवन की अग्नि मेरे सीने में धधकती है, यह कभी नहीं बुझ सकती.

– नया दिन, नयी अग्नि और नयी जीत.

हे मानवमात्र! हृदय पर हाथ रखकर कहना, क्या दुनिया में कोई दूसरी चीज इन शब्दों का मुकाबला कर सकती है? इस तरह के न जाने कितने चमत्कारी, रोगनाशक, बलवर्धक और जीत के मन्त्रों से यह हवन की प्रक्रिया भरी पड़ी है. जिंदगी की सब समस्याओं का नाश करने वाली और सुखों का अमृत पिलाने वाली यह हवन क्रिया मेरी संस्कृति का हिस्सा है, धर्म का हिस्सा है, आध्यात्म का हिस्सा है, यह सोच कर गर्व से सीना फूल जाता है. हवन मेरे लिए कोई कर्मकांड नहीं है. यह परमेश्वर का आदेश है, श्रीराम की मर्यादा की धरोहर है. श्रीकृष्ण की बंसी की तान है, रण क्षेत्र में पाञ्चजन्य शंख की गुंजार है, अधर्म पर धर्म की जीत की घोषणा है. हवन मेरी जीत का संकल्प है, मेरी जीत की मुहर है. मैं इसे कभी नहीं छोडूंगा.

अग्निवीर घोषणा करता है कि अब हम हर घर में हवन करेंगे और करवाएंगे. न जाति का बंधन होगा और न मजहब की बेडियाँ. न रंग न नस्ल न स्त्री पुरुष का भेद. अब हर इंसान हवन करेगा, सुखी होगा!

जो कोई भी व्यक्ति- हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, यहूदी, नास्तिक या कोई भी, हवन करना चाहता है, संकल्प करना चाहता है, वह यहाँ इस लिंक पर जाकर मंगा सकता है। कोई जाति धर्म- मजहब या लिंग का भेद नहीं है।

http://agnikart.com/hawan/complete-yajna-kit

Best Wishes
Team Agniveer
http://agniveer.com/
https://www.facebook.com/agniveeragni

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God Is Busy


Subject: : God Is Busy.

Short and sweet straight to the point. I love it.

If you don’t know GOD, don’t make stupid remarks!!!!!!
A young soldier was taking some college courses between assignments.
He had completed 3 tours of duty in Afghanistan.
One of the courses had a professor who was an avowed atheist and a member of the Canadian Civil Liberties Association (CCLA).

One day the professor shocked the class when he came in.
He looked to the ceiling and flatly stated, “GOD, if you are real, then I want you to knock me off this platform… I’ll give you exactly 15 min.”

The lecture room fell silent. You could hear a pin drop. Ten minutes went by and the professor proclaimed, “Here I am GOD, I’m still waiting.”

It got down to the last couple of minutes when the soldier got out of his chair, went up to the professor, and cold-cocked him; knocking him clean off the platform.
The professor was out cold.

The young soldier went back to his seat and sat there, silently.

The other students were shocked and stunned, and sat there looking on in silence.
The professor eventually came to, noticeably shaken, looked at the soldier and asked,

“What in the world is the matter with you? Why did you do that?”

The young soldier stood up and calmly replied,
“GOD was too busy today protecting soldiers, who are protecting your right to
say stupid crap and act like an idiot. So He sent me.”

The classroom erupted in cheers!

THIS IS GOOD, KEEP IT GOING!

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Arya-And-Castes In Hindu Sanatan Dharma.


Arya means a noble person/ gentleman.
 If in behavior, speech, actions, one adheres to principles of vedas – is
civilized, affectionate to fellow people, not tempted to commit sins,
hygienic, promotes and propagates truth, etc – he or she is an Arya. Again
it is not a binary logic, but a continuous function.

2. English is a poor approximate of vedic language. But Brahmin, Kshatriya,
Vaishya, Shudra are names of varnas or classifications based on profession.
They have nothing to do with birth. Shudra is someone who could not get
 adequetly educated and hence incompetent to be in any of these professions.

People in knowledge based matters are Brahmins, those in state/defence level
 matters are Kshatriyas, those in financial/ economic jobs are Vaishyas and
 rest are Shudras.

3. These Varnas are nothing to do with presently used custom of surnames. In
 fact if you read Ramayan or Mahabharat or other texts of those times, you do
not find this tradition of First Name-Middle Name-Surname as nomenclature of
people.

I would refute the basis of argument that Arya word denotes parentage
in any manner.

1. Of course, family and parentage do have their role in determining
 sanskaars of a person. But that does not mean that someone from unidentified
parentage cannot be Arya. This imaginary casteism is one of the biggest
 reasons for our decadence. We foolishly expurged a large majority of our
 fellow brothers and sisters as Shudras and Achhoots on basis of their
unknown or questionable lineage or family.

2. The Arya has nothing to do with one’s gotra. Hardly any surname today
represents any Gotra. The gotra classification was to do with preventing
marriages between closed relatives.

3. Arya denotes a noble person. Family is only one among many ways to
ascertain if someone is noble. And to say that Shudra cannot become Brahmin
is again blatantly wrong. Brahmin is someone with knowledge. And Shudra
 means someone who could not become Brahmin, Kshatriya or Vaishya due to lack
 of edcation or training. So even a Shudra, after having gained knowledge
through efforts can become Brahmin.

4. Dwija means twice born. From birth everyone is Shudra. But after
 education, Brahmins, Kshatriya and Vaishya take another birth as skilled
humans. In other words, education gives them another birth as civilized
 people worthy of contributing to society. Thus they become Dwija – twice
born. Those who are unable to gain education lose this opportunity of new
birth and hence remain Shudra.

Thus an illiterate son of Brahmin is also shudra. And any shudra, after
having gained knowledge through his or her efforts can become a brahmin,
 vaishya or kshatriya. This has nothing to do with biological birth.

Until we are able to throw away this tail of birth based caste, we can never
 be a united front for vedic empire.

Lets embrace truth and reject the trash.

Arya-And-Castes In Hindu Sanatan Dharma.

is also available in English on http://agniveer.com/9/arya-and-castes/

प्रत्येक श्रेष्ठ और सुसभ्य मनुष्य आर्य है |

अपने आचरण, वाणी और कर्म में वैदिक सिद्धांतों का पालन करने वाले, शिष्ट, स्नेही, कभी पाप कार्य न करनेवाले, सत्य की उन्नति और प्रचार करनेवाले, आतंरिक और बाह्य शुचिता इत्यादि गुणों को सदैव धारण करनेवाले आर्य कहलाते हैं |

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र यह चार वर्ण वास्तव में व्यक्ति को नहीं बल्कि गुणों को प्रदर्शित करते हैं. प्रत्येक मनुष्य में ये चारों गुण (बुद्धि, बल, प्रबंधन, और श्रम) सदा रहते हैं. आसानी के लिए जैसे आज पढ़ाने वाले को अध्यापक, रक्षा करने वाले को सैनिक, व्यवसाय करने वाले को व्यवसायी आदि कहते हैं वैसे ही पहले उन्हें क्रमशः ब्रह्मण, क्षत्रिय या वैश्य कहा गया और इनसे अलग अन्य काम करने वालों को शूद्र. अतः यह वर्ण व्यवस्था जन्म- आधारित नहीं है|

आजकल प्रचलित कुलनाम ( surname)  लगाने के रिवाज से इन वर्णों का कोई लेना-देना नहीं है | हमारे प्राचीन धर्मग्रन्थ रामायण, महाभारत या अन्य ग्रंथों में भी इस तरह से प्रथम नाम- मध्य नाम- कुलनाम लगाने का कोई चलन नहीं पाया जाता है और न ही आर्य शब्द किसी प्रकार की वंशावली को दर्शाता है|

निस्संदेह, परिवार तथा उसकी पृष्टभूमि का किसी व्यक्ति को संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण स्थान है परंतु इससे कोई अज्ञात कुल का मनुष्य आर्य नहीं हो सकता यह तात्पर्य नहीं है | हमारे पतन का एक प्रमुख कारण है मिथ्या जन्मना जाति व्यवस्था जिसे हम आज मूर्खता पूर्वक अपनाये बैठे हैं और जिसके चलते हमने अपने समाज के एक बड़े हिस्से को अपने से अलग कर रखा है – उन्हें शूद्र या अछूत का दर्जा देकर – महज इसलिए कि हमें उनका मूल पता नहीं है | यह अत्यंत खेदजनक है |

आर्य शब्द किसी गोत्र से भी सरोकार नहीं रखता | गोत्र का वर्गीकरण नजदीकी संबंधों में विवाह से बचने के लिए किया गया था | प्रचलित कुलनामों का शायद ही किसी गोत्र से सम्बन्ध भी हो |

आर्य शब्द श्रेष्टता का द्योतक है | और किसी की श्रेष्ठता को जांचने में पारिवारिक पृष्ठभूमि कोई मापदंड हो ही नहीं सकता क्योंकि किसी चिकित्सक का बेटा केवल इसी लिए चिकित्सक नहीं कहलाया जा सकता क्योंकि उसका पिता चिकित्सक है, वहीँ दूसरी ओर कोई अनाथ बच्चा भी यदि पढ़ जाए तो चिकित्सक हो सकता है. ठीक इसी तरह किसी का यह कहना कि शूद्र ब्राह्मण नहीं बन सकता – सर्वथा गलत है |

ब्राह्मण का अर्थ है ज्ञान संपन्न व्यक्ति और जो शिक्षा या प्रशिक्षण के अभाव में ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य बनाने की योग्यता न रखता हो – वह शूद्र है |  परंतु शूद्र भी अपने प्रयत्न से ज्ञान और प्रशिक्षण प्राप्त करके वर्ण बदल सकता है | ब्राह्मण वर्ण को भी प्राप्त कर सकता है |

द्विज – अर्थात् जिसने दो बार जन्म लिया हो | जन्म से तो सभी शूद्र समझे गए हैं | ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इन तीन वर्णों को द्विज कहते हैं क्योंकि विद्या प्राप्ति के उपरांत योग्यता हासिल करके वे समाज के कल्याण में सहयोग प्रदान करते हैं | इस तरह से इनका दूसरा जन्म ‘ विद्या जन्म’ होता है | केवल माता-पिता से जन्म प्राप्त करनेवाले और विद्याप्राप्ति में असफ़ल व्यक्ति इस दूसरे जन्म ‘ विद्या जन्म ‘ से वंचित रह जाते हैं – वे शूद्र हैं |

 अतः यदि ब्राह्मण पुत्र भी अशिक्षित है तो वह शूद्र है और शूद्र भी अपने निश्चय से ज्ञान, विद्या और संस्कार प्राप्त करके ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य बन सकता है | इस में माता- पिता द्वारा प्राप्त जन्म का कोई संबंध नहीं है |

आइए, हम सब सत्य ग्राही बनें, मिथ्या जातिवाद की जकड़ से मुक्त होकर एकात्म और सशक्त समाज तथा राष्ट्र का निर्माण करें | विशेष विश्लेषण के लिए पढ़ें: http://agniveer.com/4034/caste-vedas-hi/

Happy Birthday to Lord Shree Krishna.


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Morari Bapu need to Go Back to School..


Morari Bapu need to Go Back to School...

via Morari Bapu need to Go Back to School...

Support Israel For sake of Jew, Christian, Hindu and Buddhist.


 

Support Israel
Both Muslims and leftists accuse Israel of not wanting peace. Truth is always the opposite to what Muslims and leftists say. It is the Hamas
http://www.freedombulwark.net/community/groups/viewgroup/4-Israel+Supporters
Look forward to see you there.
Ali Sina    www.faithfreedom.org

This anti Israeli coalition is fully aware that Obama is hostile to Israel. This was clear even before he was elected. I wrote about it exactly two years ago.

However, Obama’s days are numbered. His popularity is sinking faster than Titanic. More people are questioning his legitimacy as the POTUS. Polls suggest that 55% of Americans want him to release all his sealed records, And in all likelihood the Democratic Party will be decimated in the coming elections. Therefore, the window of opportunity for the Muslim coalition to launch a war against Israel is only this summer.

The “humanitarian aid” flotilla heading to Gaza from Turkey by “the peace activists” was an attempt to provoke Israel and find an excuse to launch the war. Now they have the excuse. Therefore I am of the opinion that this summer there is going to be a major war in that troubled region.

Some people ask, if Israeli Defense Force knew that this flotilla is a bait, why did they try to stop it? They should have let it go through and not give their enemies the pretext that they so desperately needed. In fact the chant of “Intifada, Intifada,” and “Khaibar, Khaibar,” (Khaibar was where Muhammmad massacred an entire Jewish population) when the flotilla was leaving the port in Turkey was to provote Israel. They carried food but gave the impression to be terrorists.

I read the story of a Muslim who would go to a store acting as if he was shoplifting. His suspicious behaviour would make the security guards to stop and search him. They would find nothing stollen on him, but this would give him the pretext to sue the store for discrimination, harrassemnt, psychological stress, public humiliation, etc. This is what these “peace activists” were trying to achieve. They wanted propaganda and knew that the Lefitist media will trumpet their charade rather than report the truth.
So why did Israel took the bait? Here is the answer:

Israel cannot allow ships to go directly to Gaza for security reasons. Innocent Israeli families are threatened daily with missile attacks launched from Gaza, and Israel must make sure weapons are not being smuggled into Gaza in “humanitarian” cargoes. Israel offered to offload all humanitarian supplies on board this ship and deliver them to Gaza.

These Turkish ships know that the U.N. will deliver any and all humanitarian supplies after first examining shipments to make sure they contain no weapons. Thus it appears they deliberately provoked this incident for propaganda purposes.

Israeli commanders were attacked and beaten by the “humanitarian” workers on this ship who were armed with iron bars and knives. One soldier was thrown off an upper deck and fell thirty feet to the deck below, sustaining significant injuries to his head.

Israeli soldiers repeatedly told each other “Don’t shoot! Don’t shoot!” as they rappelled to the surface of the ship. They fired only as a last resort and in self-defense.
According to the
Weekly Standard, the organization behind this flotilla belongs to the Union of Good, which was created for the specific purpose of transferring tens of millions of dollars a year to Hamas-controlled entities in the Gaza Strip and whose leaders have been designated by our State Department as Specially Designated Global Terrorists.

Please watch this video to see what happened aboard of that ship. You can see the “peace activists” armed with metal bars beating up Israeli solders and throw one of them off the deck.

To understand the security need of Israel, please see these two videos

The war in the Middle East can end only in two scenarios.
– Muslims bring about a second holocaust to the
Jews and kill all the Israelis.
– Muslims abandon
Islam and accept Israelis as fellow humans with the right to live in peace.
There is no other way to bring peace in the Middle East. All talks of peace are futile. As long as Muslims believe in Islam, they cannot tolerate the Jews reclaiming their land after it was once claimed as
Dar al Islam. They will fight to the end of time until the total destruction of Israel. The hope that one day there will be peace between Israel and her Muslim neighbors is a delusion.

The defeat of Israel is the defeat of all of us. If Israel is allowed to be destroyed, Muslims will be so invigorated that they will start the biggest jihad against all humanity. Millions of Muslims that believe the time for jihad has not come yet will get the confirmation that this is the time.

If you love your freedom, you should stand by Israel. Please join FreedomBulwark and please invite others to do the same. Freedom does not come free. It must be earned.
War mongers spread lies. This is what the new axes of evil composed by Islam, The Left and the Media are doing. We need to fight lies with truth.

There is a new group created in FreedomBulwar in support of Israel. Please join and invite others to join. We are few in numbers but we have the truth on our side. We must spread the truth about what really happened, and what is at stake.

Here is the link to the group.
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Hinduism: Age of the earth according to Vedic chronology


 

 

Hinduism: Age of the earth according to Vedic chronology

by Sam Hindu on Friday, July 30, 2010 at 6:36am
Hinduism:
Age of the earth according to Vedic chronology
“The Hindu religion is the only one of the world’s great faiths dedicated to the idea that the Cosmos itself undergoes an immense, indeed an infinite, number of deaths and rebirths. It is the only religion in which the time scales correspond, to those of modern scientific cosmology. Its cycles run from our ordinary day and night to a day and night of Brahma, 8.64 billion years long. Longer than the age of the Earth or the Sun and about half the time since the Big Bang. And there are much longer time scales still.”

“A millennium before Europeans were willing to divest themselves of the Biblical idea that the world was a few thousand years old, the Mayans were thinking of millions and the Hindus billions.”
Dr. Carl Sagan, (1934-1996) famous astrophysicist
According to Vedic chronology, Hinduism describes the age of the earth in detail. Details can be found in the Bhagwat Maha Purana or Bhagwatam.

Our earth is part of a material manifestation called a BRAHMANDA, a group of interrelated but separate regions or abodes called lokas, each conditioned by its respective quality of material time and space. In other words, what would be equivalent to one year in one of these lokas may be correspond to 12,000 of our earth years.

Most of our brahmandais subtle and imperceptible to us. Our earth planet is part of this configuration. A brahmanda is basically comprised of one planetary system with an earth inhabited by living beings, a sun and the above described regions.

According to the chronology of Hinduism, the divine personality who creates this with God‘s grace and who oversees it is called “Brahma” (the creator). This is a seat or position located in the subtle or celestial regions of a brahmanda (Brahma – name of the creator), anda – his spherical creation, literally ‘egg’.)

In one galaxy, there is an inestimable number of brahmandas (earth planet + other interrelated and subtle abodes) and their corresponding Brahmas.

The supreme creator or original inspiration for the creation of the entire universe is God.

How old is the earth? The earth came into existence with Brahma and will exist as long as he does. As long as Brahma lives, his creation continues to exist. When his term ends, this brahamanda will enter into absolute dissolution.

In between, there are periodic episodes of dissolution and creation of a lesser order, in which the earth enters a period of dormancy, when all life ends, but is again restored. Brahma is the personality that observes and maintains this schedule.

A soul incarnates in a particular brahmanda and remains there until its end. After this, that soul will enter another brahmanda. This has happened eternally for all the souls and will continue eternally. Only the soul who becomes liberated from maya is exempted from this.

We can calculate the age of the earth from the age of Brahma. The Vedic chronology of Hinduism uses a base unit of calculation called a chaturyugi. This is comprised of 4 yugas (periods of time). Their lengths and corresponding names are:

1,728,000 years = sat yuga

1,296,000 = treta yuga

864,000 = dwapar yuga

432,000 = kali yuga

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4,320,000 years = one charturyugi (one 4-yuga cycle)

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1000 chaturyugis = one day of Brahma

1000 chaturyugis = one night of Brahma

8,640,000,000 years = one full day (24 hours) of Brahma

100 celestial years = age that Brahma lives to

50 celestial years = Brahma’s current age, or,

155.5 trillion years = the current age of this earth. bold

OM
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